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अब कवि बनाना हुआ आसान

                              अब कवि  बनाना हुआ आसान 




                                               मराठों का शान है भगवा,

शिवाजी की आन है भगवा,

भगत सिंह की जान है भगवा,

वीरों का तो नाम ही भगवा


सन्तों का आनन्द है भगवा,

प्रकृति की ये आग है भगवा,

नारायण का ललाट है भगवा,

जगन्नाथ का कपाट है भगवा


धरती का अरूणोदय भगवा,

सुर्यास्त का भाव है भगवा,

वेदों का है ज्ञान ये भगवा,

पीड़ित की तो आस है भगवा


सन्तों का सत्संग है भगवा,

भगवद्गगीता की सद्गति है भगवा,

पवनपुत्र की कान्ति है भगवा,

अखिल ब्रह्माण्ड की शान्ति है भगवा


महापुरूषों का आनन्द है भगवा,

इन्द्रधनुष का रंग है भगवा,

दिनकर का तेज है भगवा,

मस्तक का तो मान है भगवा


महाकाल का क्रोध है भगवा,

शत्रु का तो काल है भगवा,

दीपक की ज्योति है भगवा,

काशी की तो धुलि है भगवा


तिरंगे का अंग है भगवा,

धरती का उमंग है भगवा,

हिन्दु का तो भाग्य है भगवा,

जन्म-मरण से परे है भगवा

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