मिलना और मिलाना है मिलकर आगे बढ़ाना है कोरोना को हटाना है देश को आगे बढ़ाना है रहेगा देश मिटेगा दुश्मन हम सबका यही नैरा है
कोरोना महामारी या प्रकृति की बेबसी भीड़ से भरी हुयी, ये सुंदर सी सड़के, द्रुति गति से अपने स्थानों को बिना विलंब के भागते ये लोग, लाइटों की जगमगाहटे, शोर-गुल की आवाजें, आवागमन से भरा हुआ, कभी था यह उन्नत बाजार । बड़ी-बड़ी ये इमारतें, लम्बी-चौड़ी ये फैक्ट्रीयां, अत्यधिक विकास की आंधी में, अपने दूषित धुएँ से, जीना कर दी थी दूभर । असीमित प्यास से भरा था, न अपनों के पास था, न ही कोई खास था, औ ' न ही कोई आसपास था । नष्ट कर दिए सब बाग-बगीचे, बना लिए खेत औ खलिहान, सिमट गयी सब पावन नदियां, बना लिए घर और मकान । प्रकृति के सुकुमार पुत्र, वट, पीपल और नीम, उनको भी तुमने काट दिया, खण्ड खण्ड में बांट कर, आपस में ही बांट लिया । अरहर आलू आम अनार , अंजीर अखरोट अमरूद अडूसा , अन्नास अमरूद अर्जुन अशोक, अंगुर अजवायन अमलताश, बेर बास बरगद बबुल, औ ' बड़हर बिल्व ब्राह्मी बेंत, बजरी बैंगन बादाम बाजड़ा, बूटी-बरगद औ ' बाज बहेड़ा, सेब सिरस सरसों सागौन, सेम सुपारी साल संतरा, शीशम शलजम शहतुत शतावर, शकरकंद औ ...